नारी की पहचान

5 December 2013 | By प्रभुप्रसाद पदुचुरी

प्रभुप्रसाद पदुचुरी

 

जब जिजाबाई के मातृत्व ने

शिवाजी को छत्रपति बनाया ।
कस्तूरबा के पत्नीत्व ने
मोहनदास को महात्मा बनाया ।
इंदिरा के व्यक्तित्व ने
भारतवर्ष का गौरव बनाया ।
लक्ष्मीबाई के वीरत्व ने
देश को आज़ाद कराया ।
चावला की कल्पनाओं ने
सुनीता को अन्तरिक्ष पर चलाया ।
प्रतिभाताई के नेतृत्व ने
उन्हें प्रथम महिला राष्ट्रपति बनाया ।
जब भी अख़बार पढता हूँ
यह ख्याल मेरे मन में आता है
की आखिर भ्रूण कन्या का ही
सिर्फ गर्भपात कराया जाता है ।
जब तक कि दिल इस दर्द से
ठीक से उबर पाए की,
सामने कहीं पर एक और नारी पर
अत्याचार नज़र आता है ।
दोस्तों देर से ही सही जाग जाओ ,
नारी माँ है, बेटी है, बहन  है
उसे देश में अब नई पहचान दिलाओ ।

 

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